याद है क्या तुम्हें तुम्हारी वो नीली साड़ी | Saree Poetry – Mahi Kumar

याद है क्या तुम्हें तुम्हारी वो नीली साड़ी, उस पर तुम्हारी मुस्कान समझ नहीं आता के पहले तारीफ़ किसकी करूं… उस साड़ी में तुम लग रहीं थी एक नील पत्थर वही नील पत्थर, जो अब तुम से ज्यादा मेरे सपनों…











